किसकी भगति किये हित होहि | Kiski Bhagati Kiye Hit Hohi

किसकी भगति किये हित होहि

किसकी भगति किये हित होहि, झूठ बात ना भावै मोहि ॥टेक॥

राम भजो दूजो जग नाहिं, आयो जोनीसंकटमाहिं ॥१॥

कृष्ण भजो किन तीनों काल, निरदै ह्वै मार्यो शिशुपाल ॥२॥

ब्रह्मा भजो सर्वजग-व्याप, खोई सृष्टि सह्यो दुख आप ॥३॥

रुद्र भजो सवतैं सिरदार, सब जीवनि को मारनहार ॥४॥

एक रूप को कीजे ध्यान, चिन्ता करै उसे हैरान ॥५॥

भजो गनेश सदा रे! भाय, सो गजमुख परगट पशुकाय ॥६॥

इन्द्र भजो निवसै सुरलोय, सो भी मरै अमर नहिं होय ॥७॥

देवी भजो भजैं सब लोग, बकरे मारैं महा अजोग ॥८॥

भजो शीतला थिर मन लाय, देखो! डॉयनि लड़के खाय ॥९॥

किनहिं न जान्यो अपरंपार, झूठे सरब भगत संसार ॥१०॥

‘द्यानत’ नाम भजो सुखमूल, सो प्रभु कहां किधौं नभ-फूल ॥११॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)

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