कर मन! वीतराग को ध्यान | Kar Man Veetraag Ko Dhyan

कर मन! वीतराग को ध्यान

कर मन! वीतराग को ध्यान …
जिन जिनराय जिनिंद जगतपति, जगतारन जगजान ॥टेक॥

परमातम परमेस परमगुरु, परमानंद प्रधान।
अलख अनादि अनन्त अनुपम, अजर अमर अमलान ॥
कर मन! वीतराग को ध्यान ॥१॥

निरंकार अधिकार निरंजन, नित निरमल निरमान ।
जती व्रती मुन ऋषी सुखी प्रभु, नाथ धनी गुन ज्ञान ॥
कर मन! वीतराग को ध्यान ॥२॥

सिव सरवज्ञ सिरोमनि साहब, सांई सन्त सुजान ।
‘द्यानत’ यह गुन नाममालिका, पहिर हिये सुखदान ॥
कर मन! वीतराग को ध्यान ॥३॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)

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