कैसे ध्यानमग्न नेमिनाथ भगवान्, पाया है अक्षय पद निर्वाण | kaise dhyanamagna neminatha bhagavana paya hai akshaya pada nirvana

तर्ज : देखो मुनिराज निज ध्यान में मगन …

कैसे ध्यानमग्न नेमिनाथ भगवान्, पाया है अक्षय पद निर्वाण ।। टेक ।।

रोम-रोम से शान्ति सु झरती, अद्भुत प्रभुता अहो विलसती।
भासे ज्ञान में ज्ञान ही ज्ञान ।। 1 ।।

धन्य भाग्य प्रभु दर्शन पावें, भव-भव का दुर्मोह नशावें।
पावें निश्चय आतम ज्ञान।। 2।।

शान्त चित्त प्रभु रूप विचारें, सब संसार असार निहारें।
सारभूत ज्ञायक अम्लान।। 3।।

दर्शन पाकर हुए कृतार्थ, साधें नाथ सहज परमार्थ।
भाव सहित विभु! करें प्रणाम।। 4।।

हर्षित होकर जिन गुण गावें, भाव विशुद्धि सहज बढ़ावें ।
होय प्रतिष्ठित ज्ञान में ज्ञान।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १०६ से १०७
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’