क्योंकर महल बनावै पियारे
क्योंकर महल बनावै, पियारे ।
पाँच भूमि का महल बनाया, चित्रित रंग रंगावे पियारे ॥टेक॥
गोखें बैठो, नाटक निरखे, तरुणी-रस ललचावै ।
एक दिन जंगल होगा डेरा, नहिं तुझ संग कछु जावै, पियारे ॥
क्योंकर महल बनावै, पियारे ॥१॥
तीर्थंकर गणधर बल चक्री, जंगल वास रहावै ।
तेहना पण मन्दिर नहिं दीसे, थारी कवन चलावै ॥
क्योंकर महल बनावै, पियारे ॥२॥
हरिहर नारद परमुख चल गये, तू क्यों काल बितावै।
तिनतें नवनिधि चारित आदर, ‘ज्ञानानन्द’ रमावै, पियारे ॥
क्योंकर महल बनावै, पियारे ॥३॥
Artist: पं. ज्ञानानन्द जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं ज्ञानानन्द कृत भजन)
खोज: Kyonkar Mahal Banavai Piyare