करुणा ल्यो जिनराज हमारी, करुणा ल्यो ।।टेक।।
अहो जगतगुरु जगपती, परमानंदनिधान ।
किंकर पर कीजे दया, दीजे अविचल थान ।।१।। हमारी. ।।
भवदुखसों भयभीत हौं, शिवपदवांछा सार ।
करो दया मुझ दीनपै, भवबंधन निरवार ।।२।। हमारी. ।।
पर्यो विषम भवकूपमें, हे प्रभु! काढ़ो मोहि ।
पतितउधारण हो तुम्हीं, फिर-फिर विनऊं तोहि ।।३।। हमारी. ।।
तुम प्रभु परमदयाल हो, अशरण के आधार ।
मोहि दुष्ट दुख देत हैं, तुमसों करहुं पुकार ।।४।। हमारी. ।।
दु:खित देखि दया करै, गाँवपती इक होय ।
तुम त्रिभुवनपति कर्मतैं, क्यों न छुड़ावो मोय ।।५।। हमारी. ।।
भव-आताप तबै भुजैं, जब राखो उर धोय ।
दया-सुधा करि सीयरा, तुम पदपंकज दोय ।।६।। हमारी. ।।
येहि एक मुझ वीनती, स्वामी! हर संसार ।
बहुत धज्यो हूँ त्रासतैं, विलख्यो बारंबार ।।७।। हमारी. ।।
पदमनंदिको अर्थ लैं, अरज करी हितकाज ।
शरणागत ‘भूधर’-तणी, राखौ जगपति लाज ।।८।। हमारी. ।।
Artist: पं. श्री भूधरदास जी
स्रोत: भूधर भजन सौरभ, पृष्ठ ५१ से ५२
