गर्भ कल्याणक की शुभ घड़ी आई, बधाई हो बधाई वामा माता बधाई…
सोलह सपने अद्भुत देखे, उनके फल राजा से पूछे।
रानी तेरे गर्भ से सुन्दर पुत्र होगा, तीन लोक का नाथ बनेगा।
स्वप्न फलों को सुन माता हर्षाई…
बधाई हो बधाई… गर्भकल्याणक की… बधाई हो।
सुपति की आज्ञा से वाराणसी, स्वर्गपुरी सी सजी हुई।
रत्नों की वर्षा से धरती, वाराणसी की भरी हुई।
स्वयं कुबेरजी ने नगरी सजाई ।
बधाई हो बधाई… गर्भकल्याणक की… बधाई हो।
सुरबालायें स्वर्ग से आई, देवीय वस्त्राभूषण लाई।
रत्नकुक्षी धारिणी वामा माता की सेवा कर के तृप्ति पाई ॥
तत्त्व चर्चा कर शंका मिटाई बधाई हो बधाई… गर्भकल्याणक की… बधाई हो।
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ १२६ से १२७
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