करो कल्याण आतम का | Karo Kalyaan Aatam ka

करो कल्याण आतम का,
भरोसा है ना एक पल का।

ये काया कांच की शीशी,
फूल मत देख कर इसको।
छिनक में टूट जाएगी,
कि जैसे बुदबुदा जल का ॥ १ ॥

ये धन दौलत मकान मंदिर,
इन्हें अपने बताता है।
कभी हरगिज नहीं तेरे,
छोड़ जंजाल सब जग का ॥ २ ॥

बड़ी अटवी यह जग रूपी,
फसो मत देखकर इसको।
कहे ‘चुन्नी’ समझ मन में,
सितारा ज्ञान का चमका ॥ ३ ॥

रचयिता : चुन्नीलाल जी

खोज: Karo Kalyan Atam ka

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