करलो जिनवर की पूजन
करलो जिनवर की पूजन, आई पावन घड़ी ।
आई पावन घड़ी मन भावन घड़ी ।।करलो…।।
दुर्लभ यह मानव तन पाकर, करलो जिन गुणगान ।
गुण अनन्त सिद्धों का सुमिरण, करके बनो महान् ।।करलो…।।
ज्ञानावरण दर्शनावरणी मोहनीय अंतराय ।
आयु नाम अरु गोत्र वेदनीय, आठों कर्म नशाय ।।करलो…।।
धन्य धन्य सिद्धों की महिमा, नाश किया संसार ।
निजस्वभाव से शिवपद पाया, अनुपम अगम अपार ।।करलो…।।
जड़ से भिन्न सदा तुम चेतन करो भेद विज्ञान ।
सम्यक्दर्शन अंगीकृत कर निज की कर पहचान ।।करलो…।।
रत्नत्रय की तरणी चढ़कर चलो मोक्ष के द्वार ।
शुद्धातम का ध्यान लगाओ हो जाओ भव पार ।।करलो…।।
स्रोत: करलो जिनवर की पूजन (पंडित सदासुख ग्रन्थमाला, अजमेर), पृष्ठ ३२ से ३४