कोई महिमा है अद्भुत नाथ, कैसे वचन से कहूँ | koi mahima hai adbhuta natha kaise vachana se kahu n

तर्जः निर्ग्रन्थ महा मुनिराज…

कोई महिमा है अद्भुत नाथ, कैसे वचन से कहूँ ।। टेक ।।

निज आतम में ही सुस्थित हो, लोकालोक झलकाय ।
तो भी प्रभु निर्धार तृप्त हो, सुख अनंत विलसाय।। 1।।

दर्शन कर दिव्यध्वनि सुनकर, भविजन शिवमग पाय।
वीतराग सर्वज्ञ जिनेश्वर, कर्त्तापन नहीं थाय।। 2।।

बिन श्रृंगार परम शोभित हो, देखत चित हरषाय।
भेदज्ञान हो, शुद्धातम ही सर्वोत्तम दिखलाय।। 3।।

इन्द्रियादि बिन ज्ञान अनंता, भोगों बिन आनंद।
बाह्य विभूति बिना ही प्रभुता, सहजहिं शीश नमंत ।। 4।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ५१
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’