घर आवो सुमति वरनार | Ghar Aavo Sumati Varnaar

घर आवो सुमति वरनार

घर आवो सुमति वरनार तेरी सूरत मन भाती है ॥टेक॥

कुमति दुहाग दिया तुझ कारण जो तू चाहती है ।
पूनम चन्द्र तेरा मुख है क्यों नहीं दिखलाती है ॥
घर आवो सुमति वरनार तेरी सूरत मन भाती है ॥१॥

मुनि जन इन्द्रबली नारायण सब मन भाती है ।
स्वर्ग चन्द्र सूरज तू अंत को शिव ले जाती है ॥
घर आवो सुमति वरनार तेरी सूरत मन भाती है ॥२॥

तुझको पाकर परमाद मोह की थिति घट जाती है ।
‘न्यामत’ प्रीति करी तेरे से अब नहीं जाती है ॥
घर आवो सुमति वरनार तेरी सूरत मन भाती है ॥३॥


Artist: पं. न्यामतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं न्यामतराय कृत भजन)

खोज: Ghar Aavo Sumati Varnaar, Ghar Avo Sumati Varnar