कुमता के संग जाय चेतन बरज्यो नहीं मानत मानी
(राग पीलू)
कुमता के संग जाय चेतन बरज्यो नहीं मानत मानी ॥ टेर ॥
या कुमता म्हारी जनम की वैरन, मोह लियो जी ज्ञानी रे ।
याही विषयन संग लिपटानी ॥ १ ॥
चोरासी के दुख भुगताये-तोहू दिल विच आनी रे ।
है यह दुरगति दुख दानी ॥ २ ॥
पारस सीख सुगुरु की धर कर, तज कुमता दुख दानीरे ।
याते पावोगे शिवरानी ॥ ३ ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ४६ (विभिन्न कवियों के भजन)