कोई जब साथ न आये
कोई जब साथ न आये, ना संग में जाये ।
तो फिर क्यों प्रीत बढ़ाये, झूठी ममता में पड़ यार ॥टेक॥
तू तेरा ले रूप पिछान, तन तेरा नही है नादान ।
काया है पुद्गल, तू चेतन है, मान ।
ज्ञाता-दृष्टा कहलाये, क्यों बोध भुलाये ॥
तो फिर क्यों प्रीत बढ़ाये, झूठी ममता में पड़ यार ॥1॥
अब भी समय है प्यारे मान, पुण्य घड़ी मत बिसर अजान ।
आतम निधि यह, शिव सुख खान ।
जीवन सार कमाले ‘सौभाग्य’ पद पाले ॥
तो फिर क्यों प्रीत बढ़ाये, झूठी ममता में पड़ यार ।
कोई जब साथ न आये, ना संग में जाये ॥2॥
Artist: श्री सौभाग्यमल जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं सौभाग्यमल कृत भजन)
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