गाओ-गाओ-गाओ जिनशासन की महिमा | gao gao gao jinashasana ki mahima

गाओ-गाओ-गाओ जिनशासन की महिमा।

लाओ-लाओ-लाओ निज आतम की महिमा ।। टेक ।।

आतम की महिमा पिछाने जो प्राणी।
निश्चय ही होवे वह सम्यक्ज्ञानी ।।
भव दुःख नशावे, वह शिव सुख पावे।
आवागमन का वह फेरा मिटावे ।। 1 ।।

अंजन से पापी तिरे जैनशासन से।
तिर्यञ्च सुधरे अहो जैनशासन से ।।
नरकों में भी साता हो जैनशासन से।
मुक्ति का मारग खुले जैनशासन से ।। 2 ।।

वीतराग सर्वज्ञ देव कहे हैं।
ज्ञानी सु-निर्ग्रन्थ गुरुवर कहे हैं।।
स्याद्वादमय जिनवाणी कही है।
परम अहिंसा धर्म सही है ।। 3 ।।

छह द्रव्यमय विश्व अनादि अनंत ।
कर्ता नहीं मात्र ज्ञाता भगवन्त ।।
जीवादि सात तत्त्व निरूपित है जिसमें ।
उपादेय शुद्धात्मा एक जग में ।। 4।।

आत्मानुभूति ही है जिनशासन ।
पुरुषार्थ से भव्य प्रगटाओ पावन।।
अनुभव करो ज्ञान में ज्ञान ही है।
ज्ञानमयी स्वयं भगवान् ही है।। 5।।

भक्ति से भगवंत को शीश नाओ।
प्रभुता स्वयं की स्वयं में ही पाओ।।
तृप्त रहो काल अनन्त स्वयं में।
मुक्ति भी पाओ सहज ही स्वयं में।। 6।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २५९ से २६०
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’