कित गये पंच किसान हमारे
कित गये पंच किसान हमारे ॥टेक॥
बोयो बीज खेत गयो निरफल, भर गये खाद पनारे ।
कपटी लोगों से साझा कर कर हुये आप विचारे ॥
कित गये पंच किसान हमारे ॥1॥
आप दिवाना गह गह बैठो, लिख लिख कागद डारे ।
बाकी निकसी पकरे मुकद्दम, पांचों हो गये न्यारे ॥
कित गये पंच किसान हमारे ॥2॥
रुक गयो शबद नहिं निकसत, हा हा कर्म सों हारे ।
‘बनारसि’ या नगर न बसिये, चल गये सीचन हारे ॥
कित गये पंच किसान हमारे ॥३॥
Artist: पं. बनारसीदास जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं बनारसीदास कृत भजन)
खोज: Kit Gaye Panch Kisan Hamare