प्रूफरीडिंग बाकी है
ये बोल रिकॉर्डिंग से मशीन द्वारा लिखे गए हैं, इनमें अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
कोई राज महल में रोये, कोई परनकुटी में सोये ।
अलग अलग हैं जनम के अँगना, मरन का मरघट एक है ।।
कोई हल्की, कोई भारी, कोई गहरी, कोई उथली,
सब माटी की बनी गगरियाँ, ना कोई असली, ना कोई नकली ।
अलग अलग घट भरे गगरिया, पनघट सबका एक है ।।1।।
कहीं फ़िरोज़ी, कहीं हैं पीले, लाल गुलाबी, काले नीले,
भाँत भाँत की तस्वीरों में, रंग भरे हैं सूखे गीले ।
चेहरे सबके अलग अलग हैं, मोह का घूँघट एक है ।।2।।
खेल रहे सब आँख मिचौनी, सबकी सूरत देख सलोनी,
सोच समझ कर दाव लगा ले, टाले नहीं टले जो होनी ।
अलग अलग सब खेल खिलाड़ी, गिरमिट सबका एक है ।।3।।
सब जाएँगे आगे पीछे, हाथ पसारे, आँखें मीचे,
स्वर्ग नरक सब साँची बातें, पुण्य से ऊँचे, पाप से नीचे ।
आए तो सौ सौ अँगड़ाई, मौत की करवट एक है ।।4।।
रचयिता : अज्ञात
स्वर : पण्डित श्री मांगीलाल जी, कोलारस
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स्रोत: JinSwara ऑडियो संग्रह।