कारण समय, शाश्वत समयसार
कारण समय, शाश्वत समयसार,
नित्य निरंजन समयसार हूँ ।।टेक।।
स्वयं सिद्ध निर्भय, अनंत सुगुणमय,
नित्य निरामय समयसार हूँ ।
कर्मादि से भिन्न, रागादि से भिन्न,
सहज सदा ही समयसार हूँ ।।1।।
नव तत्त्वों से भिन्न, गुण भेद से भिन्न,
पारिणामिक समयसार हूँ ।
ज्ञेयों का ज्ञायक न ज्ञायक का ज्ञायक,
निरपेक्ष ज्ञायक समयसार हूँ ।।2।।
सहज मुक्त हूँ मैं सदा मुक्त हूँ मैं,
अनुभूति रूप समयसार हूँ ।
परम ज्योतिमय हूँ, परम प्रभुतामय हूँ,
अहो ! मैं परम प्रभु समयसार हूँ ।।3।।
आनन्द आनन्द, आनन्द आनन्द,
आनन्दमय हूँ समयसार हूँ ।
कृतकृत्य हूँ मैं परम तृप्त हूँ मैं,
विराजित स्वयं में समयसार हूँ ।।4।।
स्रोत: जिनवाणी भक्ति, पृष्ठ १११ से ११२