किसको विपद सुनाऊँ हे नाथ | Kisko Vipad Sunaun He Nath

किसको विपद सुनाऊँ हे नाथ

किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे, (2)
तेरे सिवा न कोई जो कष्ट को मिटा दे ॥टेक॥

अपराध नाथ बेशक मैंने किये हैं भारी, (2)
हो दीन के दयालु, उनकी मुझे क्षमा दे ।
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे ।

यह कर्म दुष्ट मुझको, भटका रहे हैं दर-दर, (2)
जीवन मरण के दु:ख से हे नाथ तू बचा दे ।
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे ।

धन ज्ञान अपना खोकर, परेशान हो रहा हूँ, (2)
शान्ति हृदय में आवे, वो उपाय तो सुझा दे ।
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे ।

टाला नहीं है टलता, विधि का उदय किसी से, (2)
‘शिवराम’ शोक चिंता, तू चित से हटा दे ।
किसको विपद सुनाऊँ, हे नाथ तू बता दे ।


Artist: पं. शिवराम जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (अध्यात्म भजन)

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