तत्त्वार्थसूत्र-प्रदीपिका (आचार्य उमास्वामि, व्याख्या डॉ. वीरसागर जैन) | Tattvarthasutr Pradipika

तत्त्वार्थसूत्र-प्रदीपिका
(आचार्य उमास्वामि कृत ‘तत्त्वार्थसूत्र’ की सरल-सुबोध व्याख्या)

मूल रचना: आचार्य उमास्वामि
व्याख्याकार: प्रो. वीरसागर जैन
प्रकाशक: भारतीय ज्ञानपीठ
First Edition : 2017

अनुक्रमणिका

  1. प्रस्तावना
  2. पहला अध्याय
  3. दूसरा अध्याय
  4. तीसरा अध्याय
  5. चौथा अध्याय
  6. पाँचवाँ अध्याय
  7. छठा अध्याय
  8. सातवाँ अध्याय
  9. आठवाँ अध्याय
  10. नौवाँ अध्याय
  11. दसवाँ अध्याय

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अनुयोग सूची: अनुयोग अनुसार ग्रन्थ (अ से ज्ञ)
तत्त्वार्थ सूत्र अध्याय 2 | Tattvarth Sutra Adhyay 2
तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 4: चार निकाय के देव, ज्योतिष्क, वैमानिक, स्वर्ग, लौकान्तिक, आयु | Tattvarthsutra Adhyay 4: Sampurn Vivechan
तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 8: बन्ध के कारण, चार बन्ध, आठ कर्म और 148 प्रकृतियाँ, स्थिति, अनुभाग | Tattvarthsutra Adhyay 8: Sampurn Vivechan
तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 5: छह द्रव्य, अजीवकाय, प्रदेश, उपकार, पुद्गल, सत्, बन्ध, गुण पर्याय | Tattvarthsutra Adhyay 5: Sampurn Vivechan
तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 6: योग, आस्रव, पुण्य पाप, अधिकरण, आठ कर्मों के आस्रव, सोलह कारण | Tattvarthsutra Adhyay 6: Sampurn Vivechan
तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 7: पाँच व्रत, भावनाएँ, श्रावक के बारह व्रत, सल्लेखना, अतिचार, दान | Tattvarthsutra Adhyay 7: Sampurn Vivechan
तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 9: संवर, गुप्ति, समिति, दस धर्म, बारह भावना, परीषह, तप, ध्यान, निर्जरा | Tattvarthsutra Adhyay 9: Sampurn Vivechan
तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 10: केवलज्ञान, मोक्ष, सिद्ध जीव का ऊर्ध्वगमन और स्वरूप | Tattvarthsutra Adhyay 10: Sampurn Vivechan
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