ज्ञान और आनन्द के महत्त्व को रेखांकित करती है दीपावली | Jnan Aur Anand Ke Mahattv Ko Rekhankit Karati Hai Dipavali

ज्ञान और आनन्द के महत्त्व को रेखांकित करती है दीपावली

-प्रो. (डॉ.) वीरसागर जैन

दीपावली कब से और क्यों मनाई जाती है- इस विषय को फिलहाल हम यहाँ छोड़ दें तो भी इसमें कोई सन्देह नहीं है कि दीपावली भारतीय संस्कृति का एक सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पर्व है और उसे आज भी सर्वत्र बड़े ही उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। दीपावली आज भी पर्वों का राजा है।

विचारणीय है कि दीपावली का इतना अधिक महत्त्व क्यों है और उसका मूल सन्देश क्या है?

उत्तर- दीपावली को मनाने का कारण कोई भी रहा हो परन्तु मैं समझता हूँ कि उसका एकमात्र सन्देश यही होना चाहिए कि हम अपने जीवन में ज्ञान और आनन्द- इन दो चीजों का महत्त्व समझें, बड़ी ही गंभीरतापूर्वक समझें, क्योंकि दीपावली ज्ञान और आनन्द का पर्व है।

हम अपने घर की, बाहर की हर छोटी-मोटी चीज का महत्त्व समझते हैं, चाहे वह जड़ अचेतन ही हो, अपनी टूटी-फूटी चप्पल और रद्दी अखबार की भी कीमत समझते हैं; पर दीपावली कहती है कि आज तुम्हें ज्ञान और आनन्द का महत्त्व समझना होगा। दीपक ज्ञान का प्रतीक है, मिठाइयाँ आनन्द का प्रतीक हैं।

दीपावली का मूल सन्देश यह है कि जिस जीवन में ज्ञान और आनन्द है, वही जीवन वास्तविक जीवन है, उत्तम जीवन है। तथा जिस जीवन में ज्ञान और आनन्द नहीं है, वह जीवन जीवन नहीं, मरण है। सचमुच ही मरण है। ऐसा व्यक्ति तो चलता-फिरता शव है।

अतः अपने और दूसरों के जीवन में से अज्ञान एवं दुःख को दूर करना और ज्ञान एवं आनन्द को प्राप्त करना-कराना ही सही अर्थों में दीपावली मनाना है।

यद्यपि हम सभी जानते और कहते तो रहते हैं कि जीवन में ज्ञान और आनन्द का बड़ा महत्त्व है, परंतु फिर भी हम देखते हैं कि हमारे जीवन में ज्ञान और आनन्द की बहुत उपेक्षा होती रहती है। हम हर छोटी से छोटी चीज का महत्त्व/मूल्य समझ लेते हैं, उनकी हानि नहीं होने देते हैं पर ज्ञान और आनन्द को जीवन में सर्वोपरि नहीं रख पाते। तभी तो बारंबार ज्ञानाराधना छोड़कर जड़ भौतिक पदार्थों के चक्कर में उलझ जाया करते हैं। और इसीतरह अपने आनन्द स्वभाव को भूलकर व्यर्थ ही छोटीछोटी बात पर दुःख मनाने लग जाते हैं। दीपावली हमें पुनः-पुनः याद दिलाने आती है कि जीवन में ज्ञान और आनन्द का महत्त्व समझो। जीवन रोटी-कपड़ा, सोना-चाँदी, नौकर-चाकर से नहीं सँवरता; ज्ञान से सँवरता है, ज्ञान से पवित्र विश्व में अन्य कुछ भी नहीं है - ‘न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।’ -गीता

ज्ञान की तरह आनन्द भी जीवन का एक बड़ा भारी मूल्य है। दीपावली हमें कहती है कि सदा आनन्दित रहो, कभी दुःखी मत होओ, चाहे कुछ भी हो जाए, आनन्द तुम्हारा स्वभाव है। खेद, ताप, संताप, तनाव, शोक, चिन्ता, भय आदि सब दुःख के ही विविध प्रकार हैं और तुम इन सबसे ऊपर उठकर सदैव आनन्द की आराधना में लगे रहो।

इसप्रकार दीपावली ज्ञान और आनन्द के महत्त्व को ही रेखांकित करनेवाला महापर्व है। काश, हम सब इसके इस मूल सन्देश को भलीभाँति सुनें-समझें।

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