यो तन जावे तो जावो, मेरी उत्तम क्षमा न जाय | Yo Tan Jave To Javo, Meri Uttam Kshama Na Jaay

यो तन जावे तो जावो, मेरी उत्तम क्षमा न जाय

यो तन जावे तो जावो, मेरी उत्तम क्षमा न जाय ॥टेक॥

बिना दोष दुर्जन दु:ख देवे, धीरज धार सबही सह लेवे,
क्रोध जरा नहीं लाय, मेरी उत्तम क्षमा न जाय ॥१॥

क्षमा को धारे जो तन पर, लगे न गोली तोरे बदन पर,
दुश्मन ही थक जाय, मेरी उत्तम क्षमा न जाय ॥२॥

क्रोध अग्नि संसार जला के, क्षमा नीर से उसे बुझाए,
वह नर धन्य कहाय, मेरी उत्तम क्षमा न जाय ॥३॥

क्षमा समान और नहीं दूजा, सभी करो मिल इसकी पूजा,
‘मख्खन’ ही सुख पाय, मेरी उत्तम क्षमा न जाय ॥४॥

क्षमा करे जग में सुख साता, यही सुरग मोक्ष की दाता,
यही शिवराज दिलाय, मेरी उत्तम क्षमा न जाय ॥५॥


Artist: पं. मख्खनलाल जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं मख्खनलाल कृत भजन)

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