विषय भोग में तूने अय जिया कैसे जीको अपने लगा दिया
विषय भोग में तूने अय जिया कैसे जीको अपने लगा दिया।
तेरा ज्ञान सूर्य समान था कैसे बादलों में छुपा दिया ॥
तू तो सच्चिदानन्द रूप है तेरा ब्रह्मरूप सरूप है ।
जड़रूप भोग विलास में तूने अपने को भुला दिया ॥
यह भोग शत्रु समान हैं छल कपट में परधान है।
तेरे यार बनके तू देखले तुझे चारों गति में रूला दिया ॥
कुमता ने अय न्यामत तुझे जगजाल में है फँसा दिया ।
दामन सुमत सी नारका तेरे कर से इसने छुड़ा दिया ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ६९ (विभिन्न कवियों के भजन)