तर्जः आज हम जिनराज …
वीरनाथ के दर्शन करके अति हर्षाये ।
अति हर्षाये-अति हर्षाये, वीर नाथ के दर्शन करके अति हर्षाये ।। टेक ।।
महाभाग्य से अहो जिनेश्वर, निकट आपके आये।
वीतरागता मय प्रभुता लख, आनन्द उर न समाये ।। 1।।
तुम्हें निरखते अहो ! महेश्वर जगत् असार दिखाये।
भव - भोगों की प्रीति सु छूटे, भेदज्ञान जग जाये।। 2।।
मार्ग सहज अन्तर में दीखे, सदृष्टि प्रगटाये।
भाव विशुद्धि बढ़े सहज ही, भव भ्रमणा मिट जाये।। 3 ।।
प्रभु सम हो पुरुषार्थ हमारा, निज प्रभुता विलसाये।
प्रभु चरणों में शीस नवायें, जन्म सफल हो जाये।। 4।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १२६ से १२७
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’