वामा घर बजत बधाई, चलि देखि री माई
वामा घर बजत बधाई, चलि देखि री माई ।।टेक।।
सुगुनरास जग आस भरन तिन, जने पार्श्व जिनराई ।
श्री ह्रीं धृति कीरति बुद्धि लछमी, हर्ष अंग न माई ।।१।।चलि. ।।
वरन वरन मनि चूर सची सब, पूरत चौक सुहाई ।
हाहा हूहू नारद तुम्बर, गावत श्रुति सुखदाई ।।२।।चलि. ।।
तांडव नृत्य नटत हरिनट तिन, नख नख सुरीं नचाई ।
किन्नर कर धर बीन बजावत, दृगमनहर छवि छाई ।।३।।चलि. ।।
‘दौल’ तासु प्रभुकी महिमा सुर, गुरु पै कहिय न जाई ।
जाके जन्म समय नरकमें, नारकि साता पाई ।।४।।चलि. ।।
Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ ९६