वा दिन को कर सोच जिय मन में | Va Din Ko Kar Soch Jiya Man Mein

वा दिन को कर सोच जिय मन में

वा दिन को कर सोच जिय मन में ।
बनज किया व्यापारी तूने, टांडा लादा भारी ॥टेक॥

ओछी पूंजी जूआ खेला, आख़िर बाजी हारी ।
आखिर बाजी हारी, करले चलने की तय्यारी ॥
इक दिन डेरा होयगा वन में ॥वा…१॥

झूठै नैना उलफत बांधी, किसका सोना किसकी चांदी ।
इक दिन पवन चलेगी आंधी, किसकी बीबी किसकी बांदी ॥
नाहक चित्त लगावे धन में ॥वा…२॥

मिट्टी सेती मिट्टी मिलियो, पानी से पानी ।
मूरख सेती मूरख मिलियौ, ज्ञानी से ज्ञानी ॥
यह मिट्टी है तेरे तन में ॥वा…३॥

कहत ‘बनारसि’ सुनि भवि प्राणी, यह पद है निरवाना ।
जीवन मरन किया सो नांही, सिर पर काल निशाना ।
सूझ पड़ेगी बुढापेपन में ॥वा…४॥


Artist: पं. बनारसीदास जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं बनारसीदास कृत भजन)

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