उड़ता है ज्ञान गगन में न्यारा (जयवंते जिनशासन) | Udta Hai Gyan Gagan Mein Nyara (Jayvante Jinshasan)

उड़ता है ज्ञान गगन में न्यारा, शासन ध्वज ये जिनमत का प्यारा।
लहराता है उन्मुक्त गगन, केसरिया ध्वज है पावन।
समता शांति की बहती धारा, जयवंते जिनशासन॥टेक॥

नव देवों में जिन मंदिर की, शोभा का ये उन्नायक है।
मंगलमय जिनशासन की, गौरव गाथा का परिचायक है॥
ये अनेकांत के शिलाखंड पर, स्याद्वाद का महल खड़ा।
एकांतवाद दूषित समस्त, अज्ञान मतों को भेद चला॥
एकांतवाद तज अनेकांत मार्ग पर, बढ़ते चलें, बढ़ते चलें।
जयवंते जिनशासन, जयवंते॥१॥

ये लहर लहर लहरा करके, देता संदेश महासुखकर।
वस्तु स्वभाव ही धर्म महा, जयवंतो जैन धर्म हितकर॥
निर्ग्रंथों का यह पंथ महा, जो सीधा शिवपुर जाता है।
जो इस पथ का अनुयायी है, वह परम मोक्ष पद पाता है॥
संयम के मार्ग निज आत्म हित लिए, बढ़ते चलें, बढ़ते चलें।
जयवंते जिनशासन, जयवंते॥२॥

श्री महावीर से कुंदकुंद तक, सबने यह फहराया है।
यह देह जाए पर धर्म नहीं, टोडरमल जी ने गाया है॥
मंगल प्रभावना योग फला, गुरुवर कहान से गुरु मिले।
मैं परमात्मा हूँ परिचय कर, लाखों मुमुक्षु हैं संग चले॥
निर्दोष मार्ग से, निष्पक्ष भाव से, बढ़ते चलें, बढ़ते चलें।
जयवंते जिनशासन, जयवंते॥३॥

सिद्धांतों से समझौता तो, हमको किंचित् स्वीकार नहीं।
जिन सिद्धांतों से स्वीकारो, समझौता इनमें करो नहीं॥
मेरु भी चलित हो जाए अरु, श्रद्धान न समकित हिलता है।
सच्चा मुमुक्षु ही जैन न्याय, पथ पर निर्भय हो चलता है॥
बहुमान से भरे, जिन ध्वज को हम लिए, बढ़ते चलें, बढ़ते चलें।
जयवंते जिनशासन, जयवंते॥४॥


Artist: ज्ञात नहीं (ऑडियो में गायक का नाम नहीं है)
स्रोत: भजन की ऑडियो रिकॉर्डिंग से लिखित, जैसा गाया गया है।

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