ऊँचे-ऊँचे शिखरों वाला
ऊँचे-ऊँचे शिखरों वाला रे, यह मंदिर हमारा ।
तीरथ हमारा हमें लागे है प्यारा ।।टेक।।
श्री जिनवर से भेंट करावे, जग को मुक्ति मार्ग दिखावे ।
मोह का नाश करावे रे, यह तीरथ हमारा ।।
शुद्धातम से प्रीति लावे, जड़ चेतन को भिन्न बतावे ।
भेदविज्ञान करावे रे, यह तीरथ हमारा ।।
विदेहक्षेत्र की याद दिलावे, सीमंधर से भेंट करावे ।
कुन्दकुन्द को प्यारा है परमागम हमारा ।।
धरसेनाचार्य की याद करावे, भूतबलि (पुष्पदंत) की महिमा आवे ।
आगम ज्ञान करावे रे, यह मंदिर हमारा ।।
सिद्ध प्रभु का स्वरूप बतावे, सिद्धों से बातें करवावे ।
सिद्धालय पहुँचावे रे, ये मंदिर हमारा ।।
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २३७ से २३८