जिनधर्म में स्त्रियों के साथ हुए तथा-कथित भेदभाव पर तर्क

#1

जिनधर्म में कई स्थानों पर स्त्रियों को पुरुषों से पीछे रखा जाता रहा है, जिस पर आज की मॉडर्न महिलाएँ प्रश्न उठा रहीं हैं।
उनके समाधान हेतु ग्रंथ आधार और तर्क आमंत्रित हैं।

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#2

जैन दर्शन में महिलायों को पीछे कहाँ ररवा गया है ,
*राजा ऋषभदेव ने अपनी बेटीयो को शिक्षा दी थी ।
*पंचम गुणस्थानवर्ती होने की पात्रता ,अष्टपाहुड़ ग्रन्थ में आर्यिका को उपचार से महाव्रती कहा है।
अगर आप पीछे अर्थ दीक्षा ,अभिषेक से वंचित होना मानते हो ।
*नग्न नहीं होने के कारण दीक्षा नहीं हो सकती यह बात युक्ति संगत है ,क्योकि उनकी नग्नता विकार वर्धक है ।
*अभिषेक इसीलिए नहीं कर सकती क्योकि जिनका अभिषेक किया जाता है वे पुरुष लिंग वाले है ,और स्त्रीयॉ उनसे विपरीत लिंग वाली होती है ,बह्यचर्य की खण्डिता का प्रसंग आएगा।

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#3

ये हुंडावसर्पनि काल का दोष था नहीं तो तीर्थंकर के सिर्फ पुत्र होते है.

इसी वजह से दिगंबर मतानुसार उन्हें मोक्ष नहीं जो सकता, किन्तु वे अगले जन्म में स्त्री प्रयाय छेद कर मोक्ष जा सकती है.

उसी प्रकार पुरुष भी आर्यिका माता के पैर नहीं छूते।

महिलाओ में menstural cycle भी होती है, और उस समय वो मंदिर जी भी नहीं जा सकती.

#4

I think it is useless to discuss the differences between Men and Women. Both are actually the same on spiritual level and if someone thinks a body might create any hindrance in spiritual progress then we should also remember that a simple hormonal imbalance can convert one to another and it is already possible in current medical science.
And even if you think there should be discussion on current question then do include transgenders too…haha (just a funny remark)

#5

बात भेद भाव की नहीं है, योग्यता की है।

  1. स्त्री नग्न दिगम्बर नहीं हो सकती इसलिए उसका मोक्ष जाना संभव नहीं है।

  2. मोक्ष जाने के लिए सम्पूर्ण परिग्रह का छोड़ना आवश्यक है, स्त्री के सम्पूर्ण परिग्रह का छोड़ना संभव नहीं है, अतः मोक्ष जाने में बाधक है।

  3. स्त्री के गुप्तांगों में निरंतर sammurchan जीवों की उत्पत्ति होती रहती है, जिसके कारण शुद्धि का हो पाना असंभव है।

  4. मासिक धर्म दिगम्बरत्व ने बाधक बनता है।
    विशेष- महिलाओं का मासिक धर्म के समय मंदिर में प्रवेश वर्जित क्यों?

  5. यदि स्त्री भी नग्न हो तो लोक मर्यादा को निभाना मुश्किल हो जाएगा। वस्त्र सहित स्त्री का शील जब खतरे में रहता है तब वस्त्र रहित स्त्री कैसे सुरक्षित रह सकती है।

  6. स्त्री गुणस्थानों की अपेक्षा 5 वे गुणस्थान तक ही जा सकती है, इससे आगे नहीं ।

  7. स्वभाव से ही स्त्री में अधिक पुरुषार्थ करने की योग्यता नहीं होती। न ही तो स्त्री इतना क्रोध कर सकती है कि 7 वे नरक जा सके , और न ही इतना उच्चतम ध्यान की मोक्ष जा सके।

  8. श्वेताम्बर स्त्री अवस्था मे मल्लीनाथ भगवान का मोक्ष मानते हैं, किन्तु दिगम्बर आम्नाय में मल्लीनाथ स्त्री नहीं पुरुष ही थे।
    जिनका संहनन (शरीर का एक प्रकार ) वज्रवृषभनाराच होता है वे ही मोक्ष जाने की क्षमता रखते हैं। कर्मभूमि की महिलाओं का यह संहनन होता ही नहीं है, अतः मोक्ष जाने में बाधक हैं।

  9. भोगभुमि में सभी पुरुष और महिला का संहनन वज्र वृषभ नाराच ही होता है, लेकिन भोगभूमि से मोक्ष किसी को भी नहीं होता, कारण की वहाँ पर चौथे गुणस्थान के आगे जाना ही संभव नहीं है ।

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#6

Bhai yeh bhi add karte sakte hai ki Striyon ke hamesha neeche ke 3 sahanan hii hote hai karma bhumi mai isliye bhi striyon ka moksha jaana sambhav nahi. Purush bhi agar heen sahanan waale ho toh moksha nahi jaa paate.

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#7

bahut sahi answer

#9

I think the question is not correct…correct question should aatma/jeev that has taken female body cannot achieve in it. There is no discrimination. Human male body is just a vehicle used to achieve moksha, thats it…it is not worth more than that…there is no superiority due to physical body…anyone can get samyekdarshan which breaks the stri-ved. All souls are same from jeevatva gun context…only difference is in charitra and gyan gun…

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#10

Nothings stops anyone from getting samyekdarshan…this is our one and only target of this life in this pancham kaal…there is no other goal or target worth pursuing but samyekdarshan. If we don’t , it is a massive waste of this very rare opportunity …take for example you have a interview where job salary is 100 million dollars per year and you waste time and do not prepare for it or not show up on time for interview…

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