तिलोयपण्णत्ती (आचार्य यतिवृषभ), हिन्दी अनुवाद सहित, भाग १ एवं २
रचयिता: आचार्य यतिवृषभ
हिन्दी अनुवाद: पं॰ बालचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री
सम्पादन: प्रो॰ आदिनाथ नेमिनाथ उपाध्ये, प्रो॰ हीरालाल जैन
प्रकाशक: जैन संस्कृति संरक्षक संघ, सोलापुर (जीवराज जैन ग्रन्थमाला)
लोक के स्वरूप का प्राचीन प्राकृत ग्रन्थ: सामान्य लोक, नारक लोक, भवनवासी लोक, मनुष्य लोक, तिर्यक् लोक, व्यन्तर लोक, ज्योतिर्लोक, सुरलोक और सिद्धलोक, नौ महाधिकारों में।
Tiloyapannatti of Acharya Yativrishabh: an ancient Prakrit text on Jain cosmography in nine mahadhikars, with Hindi translation by Pt. Balchandra Siddhantashastri.
मूल दस्तावेज़ (PDF):
- भाग १ (महाधिकार १ से ४): Tiloyapannatti_Bhag_01.pdf (15.4 MB)
- भाग २ (महाधिकार ५ से ९): Tiloyapannatti_Bhag_02.pdf (15.5 MB)