स्वयं सिद्ध प्रभु सार, सहजानन्द विलसे | svayam siddha prabhu sara sahajananda vilase

स्वयं सिद्ध प्रभु सार, सहजानन्द विलसे

(तर्ज : महावीर की जय बोल)
स्वयं सिद्ध प्रभु सार, सहजानन्द विलसे ।
शक्तियाँ अपरम्पार, अन्तर में उछले ।।टेक।।

समयसार अविकारा, देखन जाननहारा,
अनुभव गम्य सुखकारा, साँचा तारण हारा ।
आश्रय जग में सार, परमानन्द विलसे ।।1।।

बिन जाने दु:ख पाये, भव-भव में भरमाये,
ग्रैवेयक तक हो आये, परिवर्तन पंच कराये ।
पायो सुख न लगार, जीवन व्यर्थ गये ।।2।।

कोटि उपाय बनाओ, भेद-विज्ञान जगाओ,
अन्तर्मुख हो जाओ, स्वानुभूति प्रगटाओ ।
फिर न रुले संसार, ज्ञानानन्द विलसे ।।3।।

आनन्दमय मुनि जीवन, होवे सहजहिं पावन,
शुक्लध्यान प्रगटावन, शान्त दशा मन भावन ।
नाशे कर्म-विकार, मुक्ति दशा प्रगटे ।।4।।


स्रोत: जिनवाणी भक्ति, पृष्ठ ११९