सुनकर वाणी जिनवर की | Sunkar vani jinvar ki

सुनकर वाणी जिनवर की,
महारे हर्ष हिये न समाय जी ।।टेक ।।
काल अनादि की तपन बुझानी,
निज निधि मिली अथाह जी ।।१।।
संशय, भ्रम और विपर्यय नाशा,
सम्यक् बुद्धि उपजाय जी ।।२।।
नर-भव सफल भयो अब मेरो,
‘बुधजन’ भेटत पाय जी ।।३।।

Artist: श्री बुधजन जी

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