सुन सुन चेतन! लाड़ले, यह चतुराई कौन | Sun Sun Chetan Ladale Yah Chaturai Kaun

सुन सुन चेतन! लाड़ले, यह चतुराई कौन

सुन सुन चेतन! लाड़ले, यह चतुराई कौन हो ॥टेक॥
आतम हित तुम परिहर्यो, करत विषय-चिंतौन हो ॥

गहरी नीव खुदाइकै हो, मकां किया मजबूत ।
एक घरी रहि ना सकै हो, जब आवै जमदूत हो ॥१॥

स्वारथ सब जगवल्लहा हो, विनु स्वारथ नहिं कोय ।
बच्छा त्यागै गायको रे, दूध बिना जो होय ॥२॥

और फिकर सब छांडि दे हो, दो अक्षर लिख लेह ।
‘द्यानत’ भज भगवन्त को हो, अर भूखे को देह हो ॥३॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)

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