सुन चेतन चतुर सुजान, अब मन लाओ जिनवाणी | Sun Cetan Catur Sujan Ab Man Lao Jinavani

तर्ज : हे मन भजले आतम राम…

सुन चेतन चतुर सुजान, अब मन लाओ जिनवाणी।।टेक ।।

क्यों मोह नींद में सोवे, अनुभव आनंद रस खोवे।
कर लो तुम सम्यग्ज्ञान, अब मन लाओ जिनवाणी ।। सुन. ।।1 ।।

देव-शास्त्र-गुरू पहिचानों, तत्त्वों का मर्म सु जानो।
फिर करो भेदविज्ञान, अब मन लाओ जिनवाणी ।। सुन. । ।2 ।।
फिर सर्व विकल्प भगाओ, स्व सन्मुख दृष्टि लाओ।
हो स्वानुभूति सुखखान, अब मन लाओ जिनवाणी ।। सुन. ।।3।।

जिनवाणी जग हितकारी, शिवमार्ग दिखावन हारी।
प्रगटाओ आतमज्ञान, अब मन लाओ जिनवाणी।। सुन. ।।4।।

जिनवाणी पढ़ो पढ़ाओ, नित सविनय शीश झुकाओ ।
हो सब जग का कल्याण, अब मन लाओ जिनवाणी ।। सुन. ।।5।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’
स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु, पृष्ठ १७२
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ४५ से ४६