सुख आते हैं, दुःख आते हैं,
इन आते जाते सुख दुःख में
हम मस्त रहते हैं॥ टेक ॥
गाते गाते फकीरा कह जाता, कोई पैदा हुआ कोई मर जाता।
इस जन्म मरण के खेल में, -2 हम मस्त रहते हैं ॥1 ॥
कभी मान मिला जी भर-भर के, अपमान मिला जी भर-भर के।
इस मान अपमान के खेल में, -2 हम मस्त रहते हैं ॥2॥
गुरु ज्ञान पिटारा खोला है, ये जग एक सारा मेला है।
क्षण-क्षण बदलते सुख दुःख में, -2 हम मस्त रहते हैं ॥3॥
यह जीना भी कोई जीना है, विष छोड़ के अमृत पीना है।
हम अमृत पीते रहते हैं, -2 हम मस्त रहते हैं॥4॥
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २५६