शुद्धात्मानुभूति ही है नित्य मंगलमय।
शुद्धात्मानुभूति ही है नित्य आनंदमय।।टेक ।।
शुद्धात्मानुभूति ही भगवन्त का जीवन।
शुद्धात्मानुभूति ही शिवमार्ग है पावन।।
शुद्धात्मानुभूति ही है नित्य निरामय ।।1।।
शुद्धात्मानुभूति से नाशें सभी भरम।
शुद्धात्मानुभूति ही परमार्थ जिन धरम।
शुद्धात्मानुभूति ही अद्भुत प्रकाशमय ।।2।।
शुद्धात्मानुभूति ही साक्षात् समयसार ।
शुद्धात्मानुभूति ही तिहूँलोक में है सार।।
शुद्धात्मानुभूति ही सर्वत्र है अभय ।।3।।
शुद्धात्मानुभूति से श्रद्धान हो सम्यक् ।
शुद्धात्मानुभूति से हो ज्ञान भी सम्यक् ।।
शुद्धात्मानुभूतिमय ही ध्यान है सुखमय ।।4।।
शुद्धात्मानुभूति से नाशें सभी विभाव।
शुद्धात्मानुभूति से प्रगटें सुगुण स्वभाव।।
शुद्धात्मानुभूतिमय प्रभुता परम अक्षय ।।5।।
शुद्धात्मानुभूति का उद्यम सहज करो।
अन्तर्मुखी उपयोग में शुद्धात्मा वरो ।।
निर्भेद हो, निरखेद हो अनुभूति आत्ममय ।।6।।
स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’