सोई ज्ञान सुधारस पीवै
सोई ज्ञान सुधारस पीवै ॥टेक॥
जीवन दशा मृतक करि जाने, मृतक दशा में जीवै ॥
सैनदशा जाग्रत करि जानै, जागत नाहीं सोवै ।
मीतौं को दुशमन करि जाने, रिपु को प्रीतम जोवै ॥
सोई ज्ञान सुधारस पीवै ॥१॥
भोजनमाहिं वरत करि बूझै, व्रत में होत अहारी ।
कपड़े पहिरै नगन कहावै, नागा अंबरधारी ॥
सोई ज्ञान सुधारस पीवै ॥२॥
बस्ती को ऊजर कर देखै, ऊजर बस्ती सारी ।
‘द्यानत’ उलट चाल में सुलटा, चेतन-जोति निहारी ॥
सोई ज्ञान सुधारस पीवै ॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)
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