सोहां दीव (शोभा देवें) साधु तेरी बातड़ियां | Sohan Deev (Shobha Deven) Sadhu Teri Baatadiyan

सोहां दीव (शोभा देवें) साधु तेरी बातड़ियां

सोहां दीव (शोभा देवें) साधु तेरी बातड़ियां

दोष मिटावैं हरष बढ़ावैं, रोग सोग भय घातड़ियां॥सोहां. ॥१॥

जग दुखदाता तुमही साता, धनि ध्यावै उठि प्रातड़ियां॥सोहां.॥२॥

‘द्यानत’ जे नरनारी गावैं, पावैं सुख दिन रातड़ियां॥सोहां.॥३॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन १३०

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अर्थ

हे साधु ! तेरी बातें मन को सुहानी लगती हैं, अच्छी लगती हैं। इससे दोष नष्ट होते हैं, मिटते हैं और मन में प्रसन्नता बढ़ती है। ये रोग, शोक और भय को नष्ट करती हैं।

सारा जगत दुःख ही उपजानेवाला है। एक तुम ही तो हो जहाँ सुख मिलता है। इसलिए सुबह उठकर जो तुम्हारा ध्यान करता है, वह ही धन्य है।

द्यानतराय कहते हैं कि जो नर-नारी तेरा गुणगान करते हैं वे दिन-रात, सदैव सुख पाते हैं।

स्रोत: द्यानत भजन सौरभ, पद 283।

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