सिद्धालय में वीर विराजे, बोलो जय जयकार जी | Siddhalay Mem Vir Viraje Bolo Jay Jayakar Ji

सिद्धालय में वीर विराजे, बोलो जय जयकार जी।

आनन्द अपरम्पार जिनेश्वर, आनन्द अपरम्पार जी।।टेक ।।

निर्मल ध्यान लगाय कर, कर्म कलंक जलाय।
भये सिद्ध परमात्मा, बन्दूँ मन-वच-काय ।।। ।।
ध्याने योग्य स्वरूप निज, दर्शायो अविकार ।
निज स्वरूप की दृष्टि धर, नमन करें अविकार ।।2।।

स्वयं सिद्ध परमात्मा, परम ज्योति अम्लान ।
जिनशासन जयवन्त हो, जयवन्तो भगवान् ।।3।।

सफल हुआ पुरूषार्थ प्रभु, पायो पद निर्वाण।
यही भावना भावते, नित प्रति करें प्रणाम ।।4।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’