सिद्धचक्र का पाठ रचाया, सब मिल पूजन कर लो | siddhachakra ka patha rachaya saba mila pujana kara lo

तर्ज : म्हारा परम दिगम्बर …

सिद्धचक्र का पाठ रचाया, सब मिल पूजन कर लो,
हाँ सब मिल पूजन कर लो।
पुण्योदय से अवसर आया, भक्तिभाव उर धर लो,
हाँ भक्ति भाव उर धर लो।।
ज्ञायक रूप अनुपम सुखमय, प्रत्यक्ष अनुभव कर लो,

अमृत का सागर लहरावे, भवि स्नान सु कर लो।। टेक ।।

श्री जिनधर्म मिला अहो ! महाभाग्य से भव्य,
निज स्वरूप को समझ कर सफल करें पर्याय।
सहज समागम मिला है उत्तम, तत्त्वों का निर्णय कर लो ।। 1 ।।

नित्य निरंजन ज्ञानमय, निज शुद्धात्म स्वरूप,
द्रव्यदृष्टि कर अनुभवो, चिदानन्द चिद्रूप।
शुद्धातम के आश्रय से ही, मुक्ति नसैनी चढ़ लो।। 2।।

सिद्धदशा निज साध्य है, स्वयं सिद्ध है ध्येय,
स्वयं सिद्ध का ध्यान कर, पाओ सुख अमेय ।
तोरि सकल जग द्वन्द्व-फन्द, अब शिवमारग चित धर लो ।। 3 ।।

भक्तिभाव के साथ में, वर्ते भेद-विज्ञान,
उपादेय बस एक ही, निज ज्ञायक भगवान्।
सम्यक् श्रद्धा-ज्ञान सहित, सम्यक् चारित्र आचरलो।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २७१ से २७२
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’