श्री वीर निर्वाणोत्सव भक्ति | shri vira nirvanotsava bhakti

तर्ज : धन्य मुनिराज …

प्रभुवर मोक्ष पधारे हैं, गूंजे जय-जय कारे हैं।। टेक।।

सकल विभाव अभाव भये हैं, वीतरागता धारे हैं।
निजानंद में मग्न सहज ही, लोकालोक निहारे हैं।। 1।।

परम दशा को प्राप्त हुए हैं, प्रभु आदर्श हमारे हैं।
परम ध्येय निज शुद्धातम को, सहज दिखावन हारे हैं।। 2 ।।

गुण चिन्तत ही अन्तरंग में, भेदज्ञान विस्तारे हैं।
मुक्तिमार्ग में निमित्तभूत हैं, विघ्न सर्व निरवारे हैं।। 3।।

भक्तिभाव से शीश नवावें, यही भावना धारे हैं।
हो पुरुषार्थ अलौकिक प्रभु सम, प्रगटें सुगुण हमारे हैं।। 4 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ३२४
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’