जय-जय समयसार, जय-जय समयसार ।। टेक।।
कारण समयसार, कार्य समयसार।
अव्यक्त समयसार, व्यक्त समयसार।। 1।।
वाच्य समयसार, वाचक समयसार ।
आदेय जग में है अपना समयसार ।। 2।।
ध्येय समयसार, ध्यान समयसार।
साध्य समयसार, साधन समयसार।। 3।।
ज्ञेय समयसार, ज्ञान समयसार ।
ज्ञाता समयसार, मैं हूँ समयसार ।। 4।।
मैं हूँ समयसार, मैं हूँ समयसार।
अनुभव में आवे सु, मैं हूँ समयसार ।। 5 ।।
प्रभुवर का गुरुवर का, ये ही है उपकार।
दर्शाया प्रत्यक्ष, मैं हूँ समयसार ।। 6।।
अद्भुत समयसार, अनुपम समयसार।
मंगलमय आनन्दमय, मैं हूँ समयसार ।। 7 ।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १७९
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’