तर्ज : आज तो बधाई राजा नाभि के दरबार में …
गाओ रे बधाई केवलज्ञान की सुखकार रे ।। टेक ।।
वीर प्रभु मुक्ति गये गौतम गणधर केवली भये।
धन्य-धन्य-धन्य दिवस आज मंगलकार रे।। 1।।
प्रभु का विरह भुलाया, मुक्तिमार्ग दरशाया।
रागादि से भिन्न ज्ञानमय सुखकार रे।। 2।।
स्वाश्रय से कल्याण होय, भव्य सुनो मद खोय।
नित्य कल्याण रूप शुद्धातम अविकार रे।। 3।।
स्वानुभव प्रमाण करो, सत्य श्रद्धान धरो।
रत्नत्रय पथ पर बढ़ो, हर्ष उर धार रे।। 4।।
संसार असार है, शुद्धातम ही सार है।
आत्मा की साधना ही सर्व दुःखहार रे।। 5।।
अवसर गँवाओ ना, भव को बढ़ाओ ना।
ध्याओ-ध्याओ समयसार, होओ भव से पार रे ।। 6 ।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ३२१ से ३२२
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’