श्री जिनवर पद ध्यावे जे नर
(तर्ज : देखो जी आदीश्वर…)
श्री जिनवर पद ध्यावे जे नर, श्री जिनवर पद ध्यावें हैं ।टेक ।।
तिनकी कर्म कालिमा विनशे, परम ब्रह्म हो जावें हैं ।
उपल अग्नि संयोग पाय जिमि, कंचन विमल कहावें हैं ।।1।।
चन्द्रोज्ज्वल जस तिनको जग में, पण्डित जन नित गावें हैं ।
जैसे कमल सुगन्ध दशो दिश, पवन सहज फैलावें हैं ।।2।।
तिनहि मिलन को मुक्ति सुन्दरी, चित अभिलाषा लावें हैं ।
कृषि में तृण जिमि सहज उपजियो, स्वर्गादिक सुख पावें हैं ।।3।।
जनम जरा मृत दावानल ये, भाव सलिल तैं बुझावें हैं ।
‘भागचंद’ कहाँ तांई वरने, तिनहि इन्द्र शिर नावें हैं ।।4।।
Artist: भागचंद
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ५८ से ५९