तर्ज : जय-जय आदिनाथ बोलो …
जय-जय हो आदिनाथ, जय जय हो अनादिनाथ ।। टेक ।।
आदिनाथ प्रभुता लही, ध्याय अनादिनाथ ।
स्वाभाविक प्रभुतामयी, धन्य अनादिनाथ।। 1।।
दोष अठारह नाशिया, प्रभुवर आदिनाथ ।
है निर्दोष स्वभाव से, धन्य अनादिनाथ।। 2।।
अनन्त चतुष्टयवान हुए, प्रभुवर आदिनाथ ।
सहज चतुष्टयवन्त है, धन्य अनादिनाथ ।। ३।।
जाननहार सु आप हो, मैं भी जाननहार ।
महाभाग्य से पाइयो, दर्शन मंगलकार ।। ४।।
भाव सहित वन्दन करूँ, जय-जय आदिनाथ ।
ध्याऊँ ध्येय स्वरूप निज, धन्य अनादिनाथ।। ५।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ८८ से ८९
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’