शिवपुर की डगर समरससौं भरी, सो विषय विरसरचि चिरविसरी | Shivapur Ki Dagar Samarasasaun Bhari So Vishay Virasarachi Chiravisari

शिवपुर की डगर समरससौं भरी, सो विषय विरसरचि चिरविसरी

शिवपुर की डगर समरससौं भरी, सो विषय विरसरचि चिरविसरी ।।टेक।।

सम्यकदरश बोध-व्रतमय भव, दुखदावानल-मेघझरी ।।
ताहि न पाय तपाय देह बहु, जनममरन करि विपति भरी ।
काल पाय जिनधुनि सुनि मैं जन, तांहि लहूं सोई धन्य घरी ।।१।।

ते जन धनि या मांहि चरत नित, तिन कीरति सुरपति उचरी ।।
विषयचाह भवराह त्याग अब, ‘दौल’ हरो रजरहसअरी ।।२।।


Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ १५८

अर्थ

मोक्ष का मार्ग समता रस से भरपूर है जिसमें विषय से भरा नीरस मार्ग सदा के लिए विसर जाता है, विस्मृत हो जाता है। यह मोक्षमार्ग सम्यक्दर्शन, ज्ञान, चारित्र व व्रत से युक्त है जो संसार के दुःखरूपी दावानल के ऊपर मेघ की झड़ी के समान है।

स्रोत: दौलत भजन सौरभ।

:paperclip: मूल पृष्ठ (छवि):

प्रूफरीडिंग बाकी है