शिव सुखदाता जैनधर्म
शिव सुखदाता जैनधर्म ।
शिव सुखदाता जैनधर्म, जैनधर्म हाँ आत्मधर्म ।।टेक।।
नहीं किसी ने इसे बनाया, अरहंतों ने मात्र बताया ।
जिन-जिन ने समझा सुख पाया, दुखदायी भव फंद मिटाया ।।
प्राणी मात्र का जैनधर्म, शिव सुखदाता जैनधर्म ।।1।।
परम अहिंसा रूप धर्म, सत्य सनातन जैन धर्म ।
कुन्दकुन्द का यही धर्म, महावीर का यही धर्म ।।
समन्तभद्र का जैनधर्म, शिव सुखदाता जैनधर्म ।।2।।
Artist: ब्र. रवीन्द्र जी ‘आत्मन्’
स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु (श्री वर्धमान न्यास, अमायन), पृष्ठ २६५