शरण में जिनवर की आए, हाँ आए | sharana mem jinavara ki ae ha n ae

शरण में जिनवर की आए, हाँ आए।

चरणों में प्रभुवर के शिवमार्ग पाए ।। टेक ।।

सब संसार असार दिखाया,
भ्रमवश भटक-भटक दुख पाया।
मोही हो जो-जो अपनाया,
कोई भी कुछ काम न आया।। 1।।

प्रभुवर ने हमको ज्ञायक बताया,
ज्ञेयों से निरपेक्ष ज्ञायक बताया।
ध्येय रूप ध्रुव ज्ञायक बताया,
अभेद रूप ज्ञेय ज्ञायक बताया।। 2।।

जब हमने ज्ञायक पहिचाना,
ज्ञायक रूप स्वयं को जाना।
परमानन्द स्वयं में पाया,
निज वैभव प्रत्यक्ष दिखाया।। 3।।

निर्वाछक निर्भार हुआ प्रभु,
सहज रूप ज्ञातार हुआ प्रभु।
कर्म नाश निज में रम जाऊँ,
साहब सेवक भेद मिटाऊँ ।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ६४ से ६५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’