शांति वरन मुनिराई वर लखि । Shanti varan muniRai var lakhi

शांति वरन मुनिराई वर लखि

(राग जंगला)

शांति वरन मुनिराई वर लखि ।
उत्तर गुनगन सहित मूल गुन, सुभग बरात सुहाई ।। टेक ॥

तप रथपै आरूढ़ अनूपम, धरम सुमंगलदाई ।। १ ।।
शिवरमनीको पानिग्रहण करि ज्ञानानन्द उपाई ।। २ ।।
‘भागचन्द’ ऐसे बनरा को हाथ जोर सिरनाई ॥ ३ ॥

रचयिता: कविवर श्री भागचंद जी जैन

Source: आध्यात्मिक भजन संग्रह (प्रकाशक: PTST, जयपुर )