शाश्वत जीवन ज्ञानमयी, ज्ञानमयी, आनन्दमयी । ।टेक ।।
द्रव्य ज्ञानमय, गुण भी ज्ञानमय, परिणति भी नित ज्ञानमयी ।।। ।।
सत्ता ज्ञानमय, स्वरूप ज्ञानमय, अक्षय प्रभुता ज्ञानमयी ।। 2 ।।
दर्शन-ज्ञान-चरित्र ज्ञानमय, मुक्तिमार्ग है ज्ञानमयी ।।3।।
ज्ञेय ज्ञानमय, ध्येय ज्ञानमय, ध्यान भी वर्ते ज्ञानमयी ।। 4 ।।
निर्विकल्प निर्द्वन्द सहज ही, नित्य विभूति ज्ञानमयी ।।5।।
साम्राज्य है सहज ज्ञानमय, मुक्ति भी है ज्ञानमयी ।।6।।
स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’