संसारमें साता नाहीं वे
संसारमें साता नाहीं वे …
छिनमें जीना छिनमें मरना, धन हरना छिनमाहीं वे॥संसार. ॥१॥
छिनमें भोगी छिनमें रोगी, छिनमें छय-दुख पाहीं वे॥संसार.॥२॥
‘द्यानत’ लखके मुनि होवैं जे, ते पावैं सुख ठाहीं वे॥संसार.॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ११८
खोज: Sansar Mein Sata Nahin Ve
अर्थ
इस संसार में सुख नहीं है। यहाँ क्षण-क्षण में जीना, क्षण-क्षण में मरना और क्षण में ही धन को लूट लेना होता रहता है। कभी किसी क्षण में खूब भोग भोगता है, तो कभी किसी क्षण में रोगग्रस्त हो जाता है और क्षण में ही दुःख पाकर क्षत हो जाता है, मर जाता है।
द्यानतराय कहते हैं कि संसार की यह दशा देखकर जो मुनि/त्यागी/वैरागी हो जाते हैं, वे ही सुख प्राप्त करते हैं।
स्रोत: द्यानत भजन सौरभ।
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