सम्मेदशिखर-सम्मेदशिखर, हम करें वंदना आनंदकर।
जय तीर्थराज सम्मेदशिखर, हम करें वंदना आनंदकर ॥ टेक ॥
यहाँ अगणित मुनि आतम ध्याया, अक्षय परमातम पद पाया।
करें स्मरण मंगलकर, सम्मेदशिखर-सम्मेदशिखर ॥ 1 ॥
पावन सिद्धभूमि अविकारी, तत्त्वज्ञान पावें सुखकारी।
सदाकाल सबको हितकर, सम्मेदशिखर-सम्मेदशिखर ॥ २॥
जग प्रपंच सब दूर भगावें, मोक्षमार्ग में लगें लगावें।
भावें शुद्धातम सुखकर, सम्मेदशिखर-सम्मेदशिखर ॥ 3 ॥
यहाँ आकर वैराग्य बढ़ावें, प्रभु सम ही पुरुषार्थ जगावें।
ध्यावें आतम मंगलकर, सम्मेदशिखर-सम्मेदशिखर ॥ 4॥
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २९७ से २९८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’